THE SAMACHA REXPRESS/ Ranjeet Jha : ED vs west Bengal Government | Supreme courtW
नमस्कार, मैं हूं रंजीत झा और आप देख रहे हैं THE SAMACHAR EXPRESS आज हम आपको विस्तार से बता रहे हैं कि सुप्रीम कोर्ट में ईडी और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच चल रही कानूनी लड़ाई किस मोड़ पर पहुंच चुकी है।
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पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से चार एफिडेविट दाखिल किए गए:
- मुख्यमंत्री ममता बनर्जी
- राज्य सरकार
- डीजीपी
- कोलकाता पुलिस कमिश्नर
- इन एफिडेविट्स में ईडी के आरोपों का जवाब दिया गया।
- सुप्रीम कोर्ट ने ईडी से कहा था कि यदि कोई प्रत्युत्तर देना है तो *रिजवाइंडर* दाखिल करें।
- ईडी ने अपना रिजवाइंडर दाखिल कर दिया है और अब बहस की तारीख 18 मार्च तय की गई है।
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## 🔹 संवैधानिक बहस
- **आर्टिकल 32:**
- सरकार ने सवाल उठाया कि ईडी यहां कैसे पहुंची।
- ईडी का तर्क:
- जनता के मौलिक अधिकार की रक्षा
- ईडी अधिकारियों की स्वतंत्रता का अधिकार
- **आर्टिकल 131:**
- सरकार का कहना: यह केंद्र बनाम राज्य का विवाद है।
- ईडी का जवाब: यह संवैधानिक अधिकारों का विवाद नहीं, बल्कि राज्य अधिकारियों द्वारा शक्ति का दुरुपयोग है।
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## 🔹 हाई कोर्ट बनाम सुप्रीम कोर्ट
- सरकार का तर्क: मामला पहले से ही कोलकाता हाई कोर्ट में है।
- ईडी का जवाब:
- हाई कोर्ट ने पहले ही नोटिस जारी कर दिया था और ईडी के खिलाफ कार्रवाई पर रोक लगाई थी।
- इसलिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका *मेंटेनेबल* है।
## 🔹 निष्कर्ष
ईडी ने अपने रिजवाइंडर में कई कानूनी तर्क दिए हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल सरकार के चार एफिडेविट्स के सामने ये तर्क कमजोर पड़ते दिख रहे हैं।
अब असली बहस 18 मार्च को होगी, जहां सुप्रीम कोर्ट यह तय करेगा कि मामला किस संवैधानिक दायरे में आता है और किस पक्ष की दलीलें ज्यादा मजबूत हैं।
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👉 यह रिपोर्ट बताती है कि मामला केवल कानूनी नहीं, बल्कि राजनीतिक और प्रशासनिक टकराव का भी है।
अब देखना होगा कि ममता बनर्जी और उनकी सरकार इस केस को कैसे संभालती हैं और ईडी अपने तर्कों को कितना मजबूत बना पाती है।
**फिलहाल इस रिपोर्ट में इतना ही। जुड़े रहिए *द समाचार एक्सप्रेस* के साथ।**
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